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» सुरक्षातंत्र में सेंध » कैगा में गैस रिसाव, तारापुर परमाणु विद्युत केन्द्र में तस्करी और भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर में आग जैसी घटनाओं ने दिखा दी असलियत.. » 7 दिसम्बर 09 को महाराष्ट्र के तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र से परमाणु उपकरण की तस्करी करते हुए कई लोग पकड़े गए » 29 दिसम्बर 09 को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में आग लगने से दो वैज्ञानिकों की मौत » 24 नवम्बर 2009 को कर्नाटक के कैगा परमाणु संयंत्र में खतरनाक ट्रिटियम का रिसाव होने से भगदड़ मच गई » इंडिया गेट पर मिसाइल गिरने से बदल जाएगा दिल्ली का नक्शा! » हेडली के सीआईए और एफबीआई से सम्बन्धों के तार रेशे-रेशे न हो जाएं इसलिए मुंबई कांड से जुड़ा होने के बावजूद हेडली के भारत प्रयर्पण के प्रस्ताव को अमेरिका ने खारिज कर दिया है। » पाकिस्तान की परमाणु रासायनिक व जैविक हथियारों की जुगाड़ तकनीक पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों और माओवादियों तक भी पहुंच चुकी है » पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रहार प्रणाली के मुखिया हैं। हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का भाई दनयाल गिलानी यूसुफ रज़ा गिलानी का सचिव और जन सम्पर्क अधिकारी है » परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी प्लूटोनियम का भरपूर उत्पादन करने वाला खुशाब एटॉमिक रिएक्टर पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादियों की पहली पसंद हैं » पाकिस्तान के अधिकतर परमाणु ठिकाने उत्तर पश्चिम के सीमाई इलाकों में हैं जहां अफगानिस्तानी, तालिबानी और अल कायदा आतंकियों का वर्चस्व है » गौरी के प्रक्षेपण स्थल को लेकर पाकिस्तान ने दुनिया को गुमराह किया। प्रक्षेपण मलूत के टीला जोगियाना से न होकर आतंकवादियों के कब्जे वाले टूला से किया गया था जो झेलम के किनारे स्थित है » किराना की पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सैनिक चीनी विशेषज्ञों की देखरेख में मिसाइल दागने का अभ्यास करते भी देखे गए हैं
अब्दुल रहीम उर्फ तारिक रज़ा उर्फ रिचर्ड रीड और दाऊद गिलानी उर्फ डेविड कोलमैन हेडली, ये दो ऐसे नाम हैं जिन पर दुनियाभर के जासूसों की निगाह लगी हुई है। हेडली के अभी हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हाथों पकड़े जाने और मुंबई हमले की साजिश में उसके शामिल रहने की खबरें सुर्खियों में आईं। रिचर्ड रीड पहले से अमेरिका की शीर्ष सुरक्षा वाली जेल में बंद है। डेविड कोलमैन हेडली कैसे और क्यों पकड़ा गया? हेडली ने मुंबई हमले के अलावा और कौन-कौन से खास सुराग दिए? हेडली से भारतीय खुफिया एजेंसियों को पूछताछ के लिए क्यों रोक दिया गया? ऐसी क्या खास पोल है जिसके खुल जाने का डर अमेरिका को सता रहा है? भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ अमेरिकी खुफिया एजेंसी से लगातार टच में है। रीड और हेडली से मिल रहे सुरागों के बारे में सीआईए के जरिए रॉ को जो कुछ सूचनाएं मिल रही हैं बहुत काम की हैं और चौंकाने वाली हैं। खास तौर पर भारत के परमाणु संस्थानों पर खतरे और पाकिस्तान के परमाणु व रासायनिक संस्थानों पर अल कायदा के मजबूत होते शिकंजे के बारे में...
वर्ष 2009 के आखिरी दो महीनों में देश के तीन परमाणु संस्थानों में तीन ऐसे हादसे हुए जिसने भारतीय खुफिया एजेंसियों को चौंकाया और देश के परमाणु सुरक्षा तंत्र की असलियत सामने दिखाई। 24 नवम्बर 2009 को कर्नाटक के कैगा परमाणु संयंत्र में खतरनाक ट्रिटियम का रिसाव हुआ। 7 दिसम्बर 2009 को महाराष्ट्र के तारापुर परमाणु प्रतिष्ठान से अति संवेदनशील उपकरणों की हो रही तस्करी पकड़ी गई। ...और 29 दिसम्बर 2009 को महाराष्ट्र के ही मशहूर भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर में रहस्यमय आग लगी जिसमें देश के दो वैज्ञानिक जल कर खाक हो गए। कर्नाटक और महाराष्ट्र के आतंकी निशाने पर होने के बारे में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और इंटेलिजेंस ब्यूरो देश के सुरक्षा तंत्र को पहले से आगाह करता रहा है। पकड़े गए आतंकियों के सुराग और तमाम आतंकी हमले इसकी पुष्टि भी करते रहे हैं। बंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में अंधाधुंध गोलीबारी में कई वैज्ञानिकों के मारे जाने और मुंबई हमला समेत ऐसी कई घटनाएं देश के लोगों की स्मृतियों में ताजा हैं। इसके बावजूद सुरक्षा तंत्र पूरी तरह लचर साबित हो रहा है।
बड़े हादसे को अंजाम देने की तैयारी थी
कर्नाटक स्थित भारत के संवेदनशील कैगा परमाणु संयंत्र से खतरनाक ट्रिटियम (हाईड्रोजन-3) के लीक होने की वारदात एक बड़े हादसे को अंजाम देने के इरादे से की गई थी। भारत के एटॉमिक इनर्जी कमीशन के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने यह बात स्वीकार की। कैगा परमाणु केंद्र के निदेशक जेपी गुप्ता ने इस घटना को साजिश और सैबोटाज करार दिया। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ने अलग से जांच पड़ताल शुरू की और केंद्रीय परमाणु ऊर्जा मंत्रालय को उच्चस्तरीय छानबीन की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन इसके बाद चारों तरफ चुप्पी सध गई। कैगा परमाणु संयंत्र में रिसाव कराने की साजिश के पीछे कौन लोग थे? पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ते आतंकवादी गिरोहों के शिकंजे के बारे में जिस समय भारतीय खुफिया एजेंसियां तमाम सूचनाएं इकट्ठा कर रही हों ऐसे समय कैगा-षडयंत्र देश भर को एक गंभीर संकेत दे रहा है।
कैगा परमाणु संस्थान में ट्रिटियम रिसाव की घटना के बाद 7 दिसम्बर 2009 को महाराष्ट्र के तारापुर परमाणु विद्युत केंद्र से एक साथ कई लोगों को संवेदनशील परमाणु उपकरण की तस्करी करते हुए पकड़ा गया। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि यह तस्करी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। तीसरी घटना अभी 29 दिसम्बर को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में आग लगने की हुई जिसमें दो वैज्ञानिक मारे गए। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में लगी रहस्यमय आग में दो वैज्ञानिकों के मारे जाने की घटना हल्के में नहीं ली जानी चाहिए। लेकिन इन सारी घटनाओं पर संदेहास्पद चुप्पी का पर्दा डाल दिया गया है। यह तब हो रहा है जब भारत की खुफिया एजेंसियां देश के न्यूक्लियर प्रतिष्ठानों पर आतंकी हमलों के बारे में अंदेशा जता चुकी हों और केंद्र सरकार को आगाह कर चुकी हों।
हेडली के सुराग से चौकन्नी हुई रॉ
अमेरिका में पकड़े गए डेविड कोलमैन हेडली ने मुंबई हमले के बारे में क्या सुराग दिए इस पर सबको दिलचस्पी है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसी का खास मुखबिर रहते हुए उसने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी गिरोहों और वहां के परमाणु ठिकानों पर उनके बढ़ते प्रभाव के बारे में जो जानकारियां दी हैं उसने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ व देश की सैन्य खुफिया एजेंसी को चौंकाया है। इन्हीं सब वजहों से भारतीय सेना ने युद्ध के नए सिद्धांत और रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। शिमला स्थित ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एएस लांबा को इसे तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। देश की संसद पर मामूली हमला हुआ तो पूरे देश में अफरातफरी मच गई थी। अगर सीआईए से छन कर रॉ तक पहुंची सूचनाएं कभी साकार हुईं तो दिल्ली का आकार बदलते देर नहीं लगेगी।
...तो खाक हो जाएगी दिल्ली
आप कल्पना करें कि संसद का गरमागरम सत्र चल रहा हो और पाकिस्तान की तरफ से एक मेगा टन वजन वाला चीनी डॉन्ग फेंग-4 (सीसीएस-3) मिसाइल दिल्ली के इंडिया गेट के पास गिरे। राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, नॉर्थ व साउथ ब्लॉक, वायु भवन, सेना भवन, कनॉट प्लेस समेत सफदरजंग, एम्स, वसंत विहार, मोतीबाग, पूसा इंस्टीट्यूट, सिविल लाइंस, आईएसबीटी, निजामुद्दीन सब मिनटों में विकराल आग में समा जाएंगे। सब कुछ राख के ढूह में तब्दील हो जाएगा... भारत के पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल के. सुंदरजी की किताब ब्लाइंड मेन ऑफ हिन्दुस्तान में परमाणु हमले का वीभत्स आकलन किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अमेरिकी सेना की पाकिस्तान में बढ़ती दखल के बावजूद पाकिस्तान के आयुध कारखाने और परमाणु ठिकाने जिस तरह तालिबान समर्थक आईएसआई और आतंकवादी गिरोहों के प्रभाव में आते जा रहे हैं उससे हम त्रासद भविष्य का अंदाजा लगा सकते हैं।
चिंताजनक पाक के हालात
अमेरिका में हाल ही में गिरफ्तार किए गए आतंकवादी दाऊद गिलानी उर्फ डेविड कोलमेन हेडली ने आतंकी हमलों की तैयारियों-साजिशों के साथ-साथ पाकिस्तान की अंदरूनी हालत और उसके आतंकी संगठनों के चंगुल में फंसते जाने के बारे में जो कुछ बताया है वह खास तौर पर भारत की खुफिया एजेंसी और सेना के लिए गंभीर है। हेडली से मिल रहे सुराग से अमेरिकी फौज के पाकिस्तान सीमा से वापस नहीं लौटने की विवशता या अनिवार्यता भारतीय सैन्य विशेषज्ञों को समझ में आ रही है। पाकिस्तान के परमाणु और एटॉमिक ठिकानों पर आतंकी गिरोहों के बढ़ते चंगुल के बारे में हेडली से मिली सूचनाएं जो रॉ तक पहुंची हैं उसके तफसील में जाने से पहले यह बता दें कि डेविड कोलमैन हेडली पर यूरोप में एक आतंकवादी हमले की साजिश करने, मुंबई हमले व छह अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश करने का मामला चल रहा है। हेडली को अक्टूबर 2009 में शिकागो से गिरफ्तार किया गया। हेडली पर डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश करने का भी आरोप है जिसने पैगम्बर मोहम्मद का कार्टून छापा था।
हेडली को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इसलिए भी अधिक रहस्य बनाए हुई हैं क्योंकि अब यह बात खुल कर सामने आ गई है कि डेविड कोलमैन हेडली अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मुखबिर था और खासतौर पर उसे पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने, आईएसआई और अल कायदा की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं लेने के लिए सीआईए ने प्लांट किया था। हेडली की गिरफ्तारी उसके डबल क्रॉस की वजह से की गई। मूल रूप से हेडली अमेरिका के ड्रग इन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीआईए) का खास मुखबिर था और सीआईए हेडली की सूचनाओं का लगातार इस्तेमाल कर रही थी। हेडली के इस्तेमाल की अहमियत यह थी कि हेडली के नशीली दवाओं की खुल कर तस्करी करने के बावजूद अमेरिकी खुफिया तंत्र आंखें मूंदे रहता था।
भारत को नहीं सौपेंगे
डेविड के सीआईए और एफबीआई से सम्बन्धों के तार रेशे-रेशे न हो जाएं इसलिए मुंबई कांड से जुड़ा होने के बावजूद हेडली के भारत प्रत्यर्पण के प्रस्ताव को अमेरिका ने खारिज कर दिया है। हेडली के अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मुखबिर होने के परिप्रेक्ष्य में आप यह ध्यान रखें कि यह महज संयोग नहीं है। यह एक पूर्व नियोजित रणनीतिक-प्लान का नतीजा है। डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का भाई दनयाल गिलानी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ रज़ा गिलानी का सचिव और जन सम्पर्क अधिकारी है। युसुफ रज़ा गिलानी ही पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रहार प्रणाली के कर्ताधर्ता भी हैं। यह बात उजागर होते ही मुंबई हमले के पाकिस्तान में बैठे आरोपियों से पूछताछ करने के लिए ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों को पाकिस्तान आने से मना कर दिया गया। आप संयोगों का नियोजित खेल देखें कि हेडली के साथ गिरफ्तार हुए तहावुर हुसैन राणा का भाई पाकिस्तानी सेना का अधिकारी (साइकिएट्रिस्ट) है। हेडली और राणा, दोनों पाकिस्तानी हैं और दोनों के पास कनाडा और अमेरिका की नागरिकता है। शिकागो में हेडली का खैबर-पास नाम का बार है और राणा की शिकागो के ही डेवॉन एवेन्यु में मीट की दुकान।
पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर तालिबान की नजर
रॉ के पाकिस्तान डेस्क से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान के एटॉमिक व आयुध ठिकानों के बारे में हेडली से मिली ताजा सूचनाएं रक्षा मंत्रालय को भी अग्रसारित की गई हैं, क्योंकि पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर जिस तरह तालिबान और आतंकी तत्वों का दबाव बढ़ा है, उसके समानान्तर एहतियाती तैयारियां जरूरी हैं। इन एहतियाती तैयारियों का एक खतरनाक पहलू है कैगा परमाणु संयंत्र में रिसाव की वारदात।
बहरहाल, पिछले दो साल में पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर कम से कम तीन बड़े हमले हुए हैं। यह हमले पाकिस्तान के ही आतंकवादी गिरोहों ने किए हैं। एक नवम्बर 2007 को सरगोधा के न्यूक्लियर मिसाइल स्टोरेज सुविधा वाले सैन्य अड्डे पर हमला किया गया। दूसरा हमला एक महीने बाद ही 10 दिसंबर 2007 को कामरा न्यूक्लियर एयरबेस पर हुआ। पाकिस्तान के एटॉमिक ठिकाने पर सबसे बड़ा हमला 20 अगस्त 2008 को हुआ, जब तालिबानी आतंकियों ने वाह सैनिक छावनी स्थित आयुध भंडार पर कई रास्तों से एक साथ हमला किया और भारी तादाद में बर्बादी फैलाई। खुफिया एजेंसियों का यह भी कहना है कि काफी तादाद में हथियार व आयुध लूटे गए। अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान सिक्यूरिटी रिसर्च यूनिट के निदेशक शॉन ग्रेगरी की मदद से यह जानकारी हासिल की और इसे रॉ को बताया। भारतीय खुफिया एजेंसी को अमेरिकी-ब्रिटिश और इजराइली एजेंसियों से मिल रही सूचनाएं रॉ की अपनी अभिसूचनाओं की पुष्टि करती हैं कि पाकिस्तान के खतरनाक परमाणु और आयुध ठिकानों पर आतंकवादी संगठनों के कब्जे का दबाव बढ़ता जा रहा है जिसे प्रभावहीन करने के लिए अमेरिका को अपनी सेना पाकिस्तान के अंदर भेजनी पड़ी है।
पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर यही कहता रहा है कि उसके परमाणु ठिकाने और हथियार सुरक्षित हैं, जबकि इन ठिकानों पर लगातार हो रहे हमले दूसरी ही कहानी कहते हैं। पाकिस्तान ने भारत की सीमा से दूर रखने के इरादे से अधिकतर परमाणु ठिकाने उत्तर पश्चिम के सीमाई इलाकों में स्थापित किए और वही ठिकाने आज अफगानिस्तानी, तालिबानी और अल कायदा आतंकियों से भीषण खतरे में घिरे हुए हैं। वाह, फतेहगंज, गोलरा शरीफ, काहुटा, सिहाला, इसाखेल, चरमा, तरवाना और तक्षशिला के पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने अधिक खतरे में हैं। तालिबानियों के खात्मे की लड़ाई लड़ रही अमेरिकी व मित्र सेनाएं इस खतरे से भी आगाह हैं और उत्तरी पश्चिमी परमाणु ठिकानों की निगरानी रख रही हैं।
आतंकी और माओवादियों तक पहुंची जुगाड़ तकनीक
पाकिस्तान के परमाणु, रसायनिक, जैविक या अन्य खतरनाक आयुधों की जुगाड़ तकनीक केवल इरान, इराक या उत्तरी कोरिया को ही नहीं बल्कि अल कायदा, हमास, लिट्टे और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय कुछ आतंकी संगठनों और माओवादियों के हाथों तक भी पहुंची हैं। अमेरिकी पत्रकार डैनियल पर्ल की पाकिस्तान में हुई हत्या की वजहें तलाशने वाले बरनार्ड हेनरी लेवी ने भी पाकिस्तानी आतंकवादी गिरोहों की मिलीभगत से पाकिस्तान के परमाणु रहस्यों और साजो सामान की इरान और उत्तरी कोरिया को तस्करी किए जाने के तथ्य उजागर किए। कुछ अर्सा पहले जब भारत के कांदला बंदरगाह के पास पाकिस्तान जा रहा उत्तरी कोरिया का जहाज कू-वू-सान रॉ की सूचना पर पकड़ा गया और जहाज पर परमाणु साजो सामान और बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक से सम्बन्धित उपकरण बरामद किए गए तो बरनार्ड हेनरी लेवी के खुलासे की पुष्टि हो गई थी।
रॉ के अधिकारी का कहना है कि पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया और चीनी अधिकारियों के बीच लिंक के लिए खास तौर पर नेपाल की जमीन का इस्तेमाल हो रहा है। उत्तरी कोरिया के काठमांडू स्थित दूतावास के तीसरे सचिव रिम चैंगोरिल की गुपचुप इस्लामाबाद यात्रा भी इन्हीं ठोस लिंक का नतीजा थी। कोरियाई दूत की गोपनीय यात्रा उसी कन्साइन्मेंट प्रकरण में हुई थी, जिसे कांदला बंदरगाह पर भारतीय अधिकारियों ने पकड़ा था। इस प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि उत्तर कोरिया के उसी दूत रिम चैंगोरिल को भारत आने के लिए तीन महीने का वीज़ा दिया गया था। जहाज पकड़े जाने का मामला रफादफा करने और इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा न बनने देने की कूटनयिक कोशिशों को रिम चैंगोरिल को भारतीय वीज़ा दिए जाने से जोड़ कर देखा जा रहा है। उत्तर कोरिया को इसमें बहुत हद तक कामयाबी भी मिली। यह भारत के लिए विडंबना नहीं तो और क्या है! इस पर रॉ के अधिकारी भी अपना क्षोभ जताते हैं।
पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया के बीच परमाणु तकनीक के आदान प्रदान को उजागर करने वाली कोरियाई महिला किम की पाकिस्तान में हुई हत्या और अभी हाल ही चीन के शेनयांग प्रांत में उत्तरी कोरिया के ही एक और कूटनयिक की हुई रहस्यमय हत्या ने पाकिस्तान-चीन-उत्तरी कोरिया की आपराधिक परमाणु साठगांठ क्रिमिनल न्यूक्लियर-नेक्सस को और पुख्ता किया है। जिस कोरियाई महिला की इस्लामाबाद में हत्या हुई थी वह पाकिस्तान में उत्तर कोरियाई दूतावास के वाणिज्यदूत कांग थाई युन की पत्नी थी।
पाक के लिए नरम है अमेरिका
परमाणु क्षमताओं और उसके आतंकी-आपराधिक इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान के प्रति अमेरिका की ओर से अपनाए गए रवैये को भारत के सैन्य विशेषज्ञ अजीबोगरीब निगाह से देखते हैं। इस बात के पुख्ता संकेत मिलते हैं कि पाकिस्तान, उत्तरी कोरिया व मध्य पूर्व के कुछ देशों की ओर से ओसामा बिन लादेन व अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों को जन संहारक हथियार खास तौर पर परमाणु और जैविक हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं। अमेरिका के मियामी इलाके में फोर्ट लाउडर डेल के पास 320 लाख डॉलर कीमत की शोल्डर लॉन्चड स्टिंगर मिसाइल, छोटे हथियार व हवाई जहाज के कल पुर्जे खरीदने की कोशिश कर रहे दो पाकिस्तानियों राजा अब्बास एवं अब्दुल मलिक की कुछ अर्सा पहले हुई गिरफ्तारी ने भी पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों की तैयारियों का खुलासा किया। हथियार डीलर के छद्म में सीआईए एजेंट डिक स्टोल्ज के चपेटे में आया अब्बास पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का सक्रिय एजेंट था, जिसके मध्य पूर्व के आतंकवादी गिरोहों से सम्बन्ध बताए गए। डिक स्टोल्ज ने सीआईए को यह भी जानकारी दी है कि अब्बास परमाणु हथियारों और उसके उत्पादन में काम आने वाले भारी जल की उपलब्धता के बारे में जानकारियां इकट्ठी कर रहा था।
आईएसआई ने छुपा दिए हथियार
बहरहाल 11 सितम्बर 2001 के अमेरिकी हादसे के बाद स्थितियां बदल गई हैं। इराक और अफगानिस्तान के बाद अमेरिका धीरे-धीरे उसकी ओर सख्त हो रहा है इसे पाकिस्तान भी अच्छी तरह समझ रहा है। खासतौर पर पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अमेरिकी नजरदारी में चले जाने की आशंका है, इसे भांपते हुए आईएसआई ने कुछ हल्के परमाणु हथियार और लॉन्च व्हेकिल्स उन हाथों में दे रखे हैं जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान की दुरूह सीमाओं, जनजातीय आबादियों और भारत-चीन सीमा से जुड़ी दुर्गम पहाड़ियों में छिपे हैं और अमेरिकी सेना की तमाम जद्दोजहद के बावजूद मिल नहीं रहे।
कारखाने इस्लामी बम के
पाकिस्तान के कुछ चुनिंदा परमाणु ठिकानों में शामिल खुशाब परमाणु हथियारों के लिए विकसित प्लूटोनियम ट्रिटियम का उत्पादन करता है। पूरी दुनिया पर अमेरिका की ओर से थोपे जा रहे अस्त्रानुशासन का हास्यास्पद पहलू यह है कि खुशाब परमाणु संस्थान और काहुटा परमाणु संस्थान को इंटरनेशनल एटॉमिक इनर्जी एजेंसी (आईएईए) के अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के प्रावधानों से अलग रखा गया है। इस पर सैन्य नियंत्रण और आईएसआई वर्चस्व को लेकर अंदरूनी तनातनी लगातार चल रही है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु विशेषज्ञों की ओर से इस न्युक्लियर पावर प्लांट को नागरिक क्षेत्र के लिए खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद आईएसआई के दबाव में वहां से परमाणु उत्पाद का काम शुरू कर दिया गया।
खुशाब आतंकियों की पहली पसंद
हल्के और परिष्कृत बम (वार हेड्स) बनाने में प्लूटोनियम का बेहतर इस्तेमाल होता है, लिहाजा खुशाब एटॉमिक रिएक्टर पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों की भी पहली पसंद है। अत्यंत उन्नत यूरेनियम (हाईली इनरिच्ड यूरेनियम) भारी बमों के इस्तेमाल में आते हैं। इसके अलावा काहुटा परमाणु संस्थान से भी इतने प्लूटोनियम का उत्पादन हो जाता है कि सालाना अधिक से अधिक पांच शक्तिशाली परमाणु बम तैयार हो जाते हैं। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर सैन्य अधिकारी चिंता जताते हैं कि पाकिस्तान हाई इनरिच्ड यूरेनियम बम बनाने में लगातार सक्रिय है। पाकिस्तान यू-235 किस्म के बमों का यूरेनियम स्तर 20 फीसदी से अधिक नहीं करने के करार से बंधा होने के बावजूद 90 फीसदी तक अत्यंत घातक संवर्धित यूरेनियम बमों का निर्माण कर रहा है।
पाकिस्तान ने अपने बहुचर्चित गौरी-1 मिसाइल का प्रक्षेपण उत्तर पूर्वी पाकिस्तान में झेलम के पास मलूत के टीला जोगियान से किया था। मलूत से प्रक्षेपित मिसाइल दक्षिणी पश्चिमी शहर क्वेटा तक लक्ष्य साध सकता है। इसकी मारक क्षमता 15 सौ किलोमीटर बताई जाती है। गौरी के प्रक्षेपण के समय भी पाकिस्तान ने संसार भर को झांसे में रखा। पहले प्रक्षेपण स्थल काहुटा बताया जाता रहा, फिर अचानक उसे बदल कर टीला जोगियान कर दिया गया। गोरी-2 मिसाइल का प्रक्षेपण इस्लामाबाद से सौ किलोमीटर दक्षिण पूर्व उत्तरी पंजाब प्रांत में टीला जोगियान के दीना इलाके से किया गया था। गौरी-2 आतंकवादी संगठनों को भी पसंद है, क्योंकि यह मोबाइल लांचरों से भी दागी जा सकती है।
गौरी को लेकर भ्रम फैलाया
सबसे अजीबोगरीब बात यह है कि गौरी-1 व गौरी-2 मिसाइल के प्रक्षेपण स्थल को लेकर रॉ ही क्या दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों का भ्रम बना हुआ है। प्रक्षेपण स्थल का सही-सही पता लगाने के लिए नीमा जीयोनेट प्लेसनेट सर्वर व ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी। तकनीकी जांच में प्रक्षेपण स्थल मलूत और टीला जोगियाना, दोनों ही गलत पाए गए। रॉ का कहना है कि आईएसआई ने प्रक्षेपण स्थल को लेकर नियोजित भ्रांति फैलाई थी जिसमें उसे पूरी कामयाबी मिली। गौरी-1 और गौरी-2 मिसाइलों का प्रक्षेपण दरअसल झेलम के किनारे टूला नामक स्थान से किया गया, जिस पर बाकायदा आईएसआई का कब्जा है और वहां चुनिंदा आतंकवादी गिरोहों का वर्चस्व है।
चीनी विशेषज्ञों से प्रशिक्षण ले रहे पाक सैनिक
लाहौर के पश्चिम सरगोधा में पाकिस्तानी वायु सेना की मध्य कमान का सबसे महत्वपूर्ण एयरबेस है। यहां पाकिस्तानी सेना का महत्वपूर्ण आयुध भंडार भी है और यहां तीन सौ से पांच सौ किलोग्राम की एम-11 किस्म की परमाणु मिसाइलों के दागने की पूरी तैयारी है। अकेले सरगोधा एयरबेस पर 40 से 60 एम-11 किस्म की घातक परमाणु मिसाइलों का भंडार तैयार रखा गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय मानकों और मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) के प्रावधानों को ताक पर रख कर चीन की तरफ से मुहैया कराई गई 30 एम-11 मिसाइलें भी शामिल हैं। सरगोधा केंद्रीय आयुध भंडार के नजदीक किराना की पहाड़ियों में छिपा कर परमाणु मिसाइलें लॉन्च व्हेकिल्स पर तैनात हालत में रखी गई हैं। किराना की पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सैनिक चीनी विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त करते और उनके निर्देश पर मिसाइलें दागने का अभ्यास करते भी देखे गए हैं। भारतीय सैन्य खुफिया एजेंसी की सूचना के मुताबिक पाकिस्तान गुजरांवाला, ओकारा, मुल्तान, झांग और डेरा नवाब शाह में एम-11 किस्म की परमाणु मिसाइलें तैनात कर रहा है। आतंकवादियों ने इसी आयुध केंद्र पर अभी हाल ही में हमला बोल कर इसे अपने कब्जे में लेने की कोशिश की थी। आतंकवाद को पोषण देने वाले कई देशों के लिए काहुटा स्थित खान रिसर्च लेबोरेट्री का खास महत्व है। यहां आधुनिक परमाणु हथियारों के शोध और उत्पाद के अलावा इस संस्थान से सतह से आकाश में मार करने वाला गाइडेड मिसाइल (अंज़ा एमके-1 व एमके-2) और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल वीपन सिस्टम (बख्तर शिकन) समेत कई अन्य परिष्कृत परमाणु अस्त्र व साजो सामान तैयार होते हैं। काहुटा परमाणु केंद्र को चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉरपोरेशन से मिलने वाली गोपनीय मदद और गैस सेंट्रीफ्यूग्स में काम आने वाले हजारों रिंग मैगनेट्स के चोरी छिपे पहुंचने को भारतीय सैन्य खुफिया एजेंसी खास तौर पर उल्लेख करती है।
... तो 120 लाख मरेंगे
भारत और पाकिस्तान के बीच यदि परमाणु युद्ध हुआ तो आकलन है कि अकेले भारत में करीब 120 लाख लोग मारे जाएंगे। करीब 50 लाख लोग भयंकर रूप से जख्मी होंगे। जबकि इसमें रेडिएशन (विकिरण) से होने वाले बुखार, भूख, विस्फोट और आग से मरने वालों की तादाद शामिल नहीं है। सैन्य चिकिर्सा विशेषज्ञ कर्नल डॉ. एमएल पन्हानी व कर्नल डॉ. तेजिंदर एस भट्टी यह मानते हैं कि मिसाइलों से होने वाले जख्म बढ़ रहे हैं। अब यह 70 फीसदी तक पहुंच गया है। लिहाजा, सैन्य विशेषज्ञ परमाणु युद्ध में होने वाले जख्मों को लेकर सतर्क हो रहे हैं। वे दक्षिण एशिया में परमाणु युद्ध का बड़ा खतरा भांपते हैं। इसलिए भीषण ताप से होने वाले जख्म से निबटने की तैयारियों पर अधिक जोर है। उनका मानना है कि ऐसे एक हजार घायलों के पांच दिनों तक प्राथमिक इलाज के लिए 2850 किलोग्राम मरहम पट्टी और 21 हजार किलोग्राम इनफ्यूजन फ्लूइड की जरूरत पड़ेगी। 10 घायलों को पहले आठ घंटे के दौरान ही 60 लीटर फ्लूइड की जरूरत पड़ेगी। इस तरह 10 घायलों के लिए केवल आठ घंटे के लिए ही तीन सौ लीटर ऑक्सीजन (150 सिलिंडर) की जरूरत पड़ेगी।
कहीं रासायनिक खुराफात तो नहीं स्वाइन फ्लू?
» पाकिस्तान की कई रासायनिक कंपनियों ने भारत में फ्रेंचाइज कंपनियां खोल रखी हैं जो खतरनाक रसायन पाकिस्तान को सप्लाई करती हैं » खुफिया एजेंसियों को इस बात की आशंका है कि कहीं भारत में फैलने वाले स्वाइन फ्लू रासायनिक आतंकवाद का दुष्परिणाम तो नहीं है » पाकिस्तान ने विदेशी मदद से चोरी छिपे केमिकल वारफेयर टेक्नोलॉजी हासिल कर रखी है। वह खतरनाक रसायनों व रासायनिक हथियारों का जखीरा जुटाता जा रहा है
पाकिस्तान के पास ऐसी कई सैन्य प्रणाली हैं जो रासायनिक हथियारों में इस्तेमाल आ सकती हैं। केमिकल हथियार बनाने और उसके संग्रह के सारे प्रीकर्सर केमिकल्स पाकिस्तान के पास मौजूद हैं। सोडा ऐश, कास्टिक सोडा, सल्फ्युरिक एवं हाइड्रोक्लोरिक एसिड, सोडियम बाइ कार्बोनेट,
लिक्वड क्लोरीन, अल्युमीनियम सल्फेट, कार्बन ब्लैक, एसीटोन और एसिटिक एसिड का उत्पाद पाकिस्तान में अंधाधुंध हो रहा है। नए-नए केमिकल प्लांट तेजी से अस्तित्व में आ रहे हैं। मिलिट्री इंटेलिजेंस की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में चार सौ से 550 के बीच बड़ी रजिस्टर्ड फर्मास्युटिकल्स कंपनियां हैं जो बड़ी तादाद में पाकिस्तान में खतरनाक रसायन का उत्पादन कर रही हैं। इनमें 35 से 55 फीसदी बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं जिनका रसायन-बाजार के 60 फीसदी से अधिक शेयर पर कब्जा है। पाकिस्तान में जब एक तिहाई से अधिक दवाएं अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान, हॉलैंड और फ्रांस से आयातित होती हैं, तो फिर पाकिस्तान में इतनी रासायनिक कंपनियां क्या कर रही हैं। जवाब बिल्कुल साफ है। पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों के हाथों में रासायनिक हथियारों की आपूर्ति का आधिकारिक खुलासा हो चुका है।
भारतीय सैन्य खुफिया एजेंसी के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि पाकिस्तान ने विदेशी मदद से चोरी छिपे केमिकल वारफेयर टेक्नोलॉजी हासिल कर रखी है। पाकिस्तानी सेना के पास नसें चटखाने वाले, खून का बहाव रोकने वाले व नसों की प्रणाली प्रभावित करने वाले रसायनिक हथियार मौजूद हैं। पाकिस्तानी पक्ष के इन्कार के बावजूद सियाचिन में भारतीय सेना के खिलाफ रासायनिक हथियार के इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। पाकिस्तान रासायनिक हथियार होने की खबरों का खंडन करता रहा है। रॉ की सूचनाएं बताती हैं कि रासायनिक हथियारों के जोर-शोर से बनाए जाने की खबर मिलने पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों की टीम ने हाल ही वाह आयुध फैक्ट्री की तलाशी ली। फैक्ट्री के केमिकल प्लांट को नष्ट कराया और ध्वस्त प्लांट को आयुध फैक्ट्री परिसर में ही दफ्न कर दिया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान रासायनिक हथियार बनाने से बाज नहीं आया है।
रीड भी है शातिर
आईएसआई व डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी के क्लोज़-लिंक के प्रसंग में रॉ के अधिकारी ब्रिटेन के कुख्यात आतंकी रिचर्ड रीड का भी नाम लेते हैं, जिसकी मदद से आईएसआई ने खतरनाक रासायनिक आयुध और नागरिक ठिकानों पर उसके इस्तेमाल की रणनीति सम्बन्धी जानकारियां हासिल कीं। रिचर्ड रीड भी हेडली की तरह फिलहाल अमेरिका में कोलोरैडो के फ्लोरेंस स्थित सर्वोगा सुरक्षा वाली यूनाइटेड स्टेट्स पेनिटेंशियरी एडमिनिस्ट्रेटिव मैक्सिमम फैसिलिटी जेल में बंद है। रीड पर पेरिस से मियामी उड़ान पर जा रहे यात्री विमान में विस्फोट कराने की साजिश रचने का आरोप है।
रासायनिक और जैविक आतंकवाद के प्रयोग में उतरे आतंकवादी गिरोहों को खतरनाक रसायन और उनके इस्तेमाल की तकनीक मुहैया कराने वाली करीब चार सौ पाकिस्तानी कंपनियों का पता चल चुका है। इन कंपनियों की भूमिका का खुलासा होने के बाद कई देशों की खुफिया एजेंसियां यह नतीजा निकाल रही हैं रासायनिक आतंकवाद के दुष्प्रयोगों का परिणाम तो नहीं! रासायनिक खुराफात में लगी पाकिस्तानी कंपनियों में से कई में कुछ उन पश्चिमी देशों का भी पैसा लगा हुआ है जो आतंकवाद के खिलाफ व्यापक युद्ध छेड़ने की हिमायत करते हैं। बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स इंटरनेशनल (बीसीसीआई) की तरफ से भी इन कंपनियों को मदद मिल रही है। संदेहास्पद गतिविधियों में शामिल रहने के कारण ही ब्रिटेन में बीसीसीआई को प्रतिबंधित कर दिया गया था। पाकिस्तान की 38 रसायनिक कंपनियां इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्लैक लिस्टेड की जा चुकी हैं।
हैरतअंगेज सूचना यह है कि इनमें से कई कंपनियों ने भारत में भी कई फ्रेंचाइज कंपनियां खोल रखी हैं, जो सोडा एश, कास्टिक सोडा, सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, सोडियम बाईकार्बोनेट, लिक्विड क्लोरीन, अल्युमीनियम सल्फेट, कार्बन लैक, एसीटोन, सैरीन, मस्टर्ड गैस, फॉस्जीन, हाइड्रोजन सायनाइड व एसिटिक एसिड जैसे कई खतरनाक रसायन पाकिस्तान को मुहैया कराती हैं। इंटरपोल ने यह तथ्य भी उजागर किए हैं रासायनिक व जैविक आतंकवाद के इस अंतरराष्ट्रीय गोरखधंधे को बढ़ाने-फैलाने में आईएसआई की ज्वाइंट काउंटर इंटेलिजेंस और भारत में खासतौर पर ज्वाइंट इंटेलिजेंस नॉर्थ (जेआईएम) सक्रिय है। आईएसआई की इन इकाइयों ने जम्मू कश्मीर के अलावा नेपाल सीमा से जुड़े उत्तर प्रदेश व बिहार के माओवाद प्रभावित जिलों और आतंकवाद प्रभावित पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के सीमाई इलाकों तक अपने पैर फैला रखे हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तानी मदद यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ सेवन सिस्टर्स (उल्फोसिस) के छद्म नाम से मिलती है।
(This Cover Story of Prabhat Ranjan Deen was Published in By-Line National Weekly News Magazine (Hindi & English) - in January 16, 2010 Issue)
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